ऐ वतन!
🇮🇳ऐ वतन तेरी कसम खाकर ये कहते हैं,
तारीखों पर जागती देशभक्ति नहीं चाहिए
सच्चे देश प्रेम का परचम लहराया जाय.
आज ये प्रन लें
इंसान का इंसान से भाईचारा रहे,
जात पात की हुंकार से पहले
इंसानियत का बुलंद नारा रहे,
पाई थी आजादी हमने मिलजुलकर,
एकजुट भ्रष्टाचार मिटाने का
अब संकल्प हमारा रहे,
बांट न सके मजहबी सियासतदार
ऐसा अटूट रिश्ता और एका हमारा रहे,
बाहरी दुश्मनों से निपटेगी सेना हमारी,
भीतरी गद्दारों से लड़ने का
नेक नीयत इरादा अब हमारा रहे..
यही सच्ची आजादी होगी...
जय हिन्द... जय भारत🇮🇳
शिल्पा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें