नाम _ पारमिता षड़ंगी (लिखने की नाम. Legal name Archana Mishra)
पिता_ बंशीघर षडगीं
पति- स्वप्नेन्दु मिश्र
सहर _ कांदिवली, मुंबई
जन्म तिथि_ १३.४.१९७२
जन्म स्थान_निमापडा , ओडिशा
लेखनी_ ओडिआ और हिंदी भाषा में कहानी, कविताएँ, समीक्षा, और अनुवाद
प्रकाशित रचनाएं_
*कहानियों
पाँच ओड़िआ में एक हिंदी में
1- संपर्क र पाहाच रु ओह्लाइला परे (लेखालेखि प्रकाशन, भुवनेश्वर 2014 )
2- मुँ न थिला बेले (दक्ष प्रकाशन, भुवनेश्वर,2017)
3- अंतराले यह पांडुलिपि ब्रहृमपुर साहित्य परिषद द्वारा पुरस्कृत (2017) और प्रकाशित (2018)
4- विरोधाभास (सृजन इंडिया प्रकाशन,कटक,2017 )
5- अभिधा ( पक्षीघर प्रकाशन भुवनेश्वर,2023)
* कविता में (ओड़िया)
1- चाल किछि आंकिबा (पश्चिमा प्रकाशन, भुवनेश्वर,2022)
2- एबे तुम्हें नाहँ ( बम्बे ओमेन्स ओड़िया एसोसिएशन, मुंबई 2022)
*हिंदी में
1- इज्या ( कविता संकलन,प्रलेक प्रकाशन, मुंबई 2021)
2- संबित के पास जब मैं नहीं थी(कहानी संग्रह, अंतरंग प्रकाशन लखनऊ,2023)
* अनुवाद
1-जवाहर टनल (अग्निशेखर जी के हिंदी कविता संकलन के ओड़िया में अनुवाद ,पश्चिमा प्रकाशन,2021)
2-सुत्रधार ( केंद्र साहित्य और ओडिशा साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त सुप्रसिद्ध कवि डॉ बंशीघर षड़ंगी के कविता संकलन “सुत्रधार” का ओड़िआ से हिंदी भाषा में अनुवाद बोधि प्रकाशन, जयपुर 2023)
3- कविता र ऋतु (अमरजीत कौंके जी के हिंदी कविता संकलन का ओड़िआ में अनुवाद, पक्षीघर प्रकाशन, भुवनेश्वर,2023)
4- चंद्रकु खोजु खोजु (मिथिला के सुप्रसिद्ध कहानी कार प्रदीप बिहारी जी के द्वारा लिखी गई चुनिंदा कहानियों के ओड़िआ में अनुवाद, पश्चिमा प्रकाशन, भुवनेश्वर 2024)
6- रात बितने के बाद (केंद्र साहित्य और ओडिशा साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त सुप्रसिद्ध कवि डॉ. फनि महांति जी के चुनिंदा कविताओं को हिंदी में अनुवाद, सोपिजेन प्रकाशन, 2024)
7- सेमाने जेतिकि झरका खोलंती (अनील मिश्रा जी के हिंदी कविताओं के ओड़िआ में अनुवाद, प्रकाशिन अपेक्षा में)
7- सरोकार ( मिथिला के सुप्रसिद्ध कहानी कार प्रदीप बिहारी जी के केंद्र साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कार प्राप्त कहानी संकलन का ओड़िआ में अनुवाद, प्रकाशिन अपेक्षा में)
8- पर्णसुक्त – संजय बरूडे द्वारा मराठी में लिखी गई कविता संकलन की ओड़िया अनुवाद (प्रकाशन अपेक्षा में)
9- हिंदी कविता संकलन “इज्या” का गुजराती और मराठी भाषा में अनुवाद हो कर प्रकाशित। गुजराती भाषा में अनुवादित “इज्या” के लिए हीना मोदी जी को गुजराती साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मराठी भाषा में अनुवादित “इज्या” के लिए रचनाजी को “ग्रंथरत्न” “अग्रवन्” और “राज्यस्तरीय युगप्रवर्तक साहित्य पुरस्कार” प्राप्त हुआ।
सम्मान_
*साहित्य दर्पण श्रेष्ठ गाल्पिका सम्मान
• तिसरा किताब ब्रह्मपुर साहित्य संसद द्वारा पुरस्कृत ,
*बॉम्बे ओडिया महिला संगठन (Bowa) द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में सम्मानित,
• वीरभाषा हिन्दी साहित्य पीठ द्वारा सम्मानित,
*युबा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा ‘काव्य गौरव सम्मान’ प्राप्त|
*प्रवासी साहित्य सम्भार से सम्मानित
*ओड़िया साहित्य महामंच से सम्मानित
*विरजा साहित्य सदन से सम्मानित
*स्टोरी मिरर से कविता केलिए सम्मानित
*ईन्कडियू लिटफेस्ट से सम्मानित
*विरजा साहित्य संसद से सम्मान पत्र प्राप्ति
*राष्ट्रिय नव साहित्य कुंभ से सम्मान पत्र प्राप्ति
* कुछ बात कुछ जज़्बात की मंच से अहिल्याबाई होलकर सम्मान प्राप्त
*इंटरनेशनल प्रेस कम्युनिटी , आइपीसी न्यूज़ 24 के सौजन्य से कविता पाठ और सम्मानित
• के. बी. हिंदी सेवा न्यास ( उत्तर प्रदेश) से हिंदी कविता संग्रह “इज्या” को पुरस्कार प्राप्त
*विद्योत्तमा फाउंडेशन से नविद्योत्तमा साहित्य आराधना सम्मान प्राप्त और पुरस्कृत
* विगंस पब्लिकेशन के तरफ़ से कविता संकलन “इज्या” को गोल्डन बुक अवार्ड सम्मान प्राप्त
*काव्यपाठ और संचालन
* हिंदुस्तान प्रचार समिति और महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित
सम्मेलन में “ओडिआ कहानी के परिवर्तित धारा “ के उपर आलेख पाठ।
*ओड़िया साहित्य अकादमी के तरफ़ से मुम्बई में काव्य पाठ
*इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में संचालन और काव्य पाठ और सम्मानित
*परिचय फाउन्डेशन द्वारा आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल में संचालन और काव्य पाठ और सम्मानित
*प्रवासी साहित्य संभार के तरफ़ से आयोजित बहुभाषी कवि सम्मेलन में संचालन और काव्य पाठ
*राष्ट्रीय नव साहित्य कुंभ के तरफ़ से आयोजित कवि सम्मेलन में संचालन और काव्य पाठ
*विविध भारतीय भाषा संस्कृति संगम के तरफ़ से आयोजित कवि सम्मेलन में संचालन और काव्य पाठ
*नेशनल प्रेस कम्युनिटी , आइपीसी न्यूज़ 24 के सौजन्य से आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ
*मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ
*ओड़िशा आकाशवाणी में कहानी पाठ और संचालन
फोन_ ९८६७११३११३ (9867113113)
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(१)
रोज़ी दास
तेरे धोखे ने दर्द का पैमाइश
समझा दिया
ख्वाबों का एक
हुजूम था
फिर भी दिल तनहा था
दिल में दफन हैं लाशें
नन्हे यादों की
घायल पडी है अरमानों
किस्तों में है जींदगी
बैठा हूँ नगमों के
हुजूम मैं
पर दर्द मेरे
‘गैर’ का एहसास लिए
तनहा तड़पते हैं।
(२)
चलते चलते,खुली आँखो से
सपना देख लेती है
रोजी दास
स्वप्नों के नादान सड़क पर
खड़ा हैं राजकुमार
हाथों में गुलाब लिए
फिर भी रोजी के रुमाल के
धागों में आँसुओं की बूँदे
आँखोँ में गढ़ती है
अपनी काया
आईना न होते हुए भी
देख लेती है खुद को
जुगाड़ कर लेती है
थोड़ी सी रहस्यमय हँसी
कंकाल के मानचित्र से
(३)
रोजी दास
तुम्हारी आँखे
ठीक एक नदी जैसी
जो सूर्य के आने से पहले
जाग जाती है
ब्रह्मचारिणी जैसी ,
अकेली चलती रहती
किनारों को अनदेखा कर
रोजी
तुम्हारी आँखे,
दुश्मन है तुम्हारे सपनों की
प्यार को पुण्य में बदलने
तक इंतजार नहीं करती
(४)
रोजी दास
तुम्हारे सपने
तुम्हारी इच्छाओं में नहीं मिलते
अँधेरे के किचड़ में से
रात सा कमल
खिलने नहीं देता
रोजी दास
थोड़ी देर के लिए
अपनी आँखों को बंद कर लो
हो सकता है , तुम देख लो
अनादि काल से वो
सम्मोहित प्यार से भरा
एक शुन्य स्थान और
बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर
चांदनी रात में,
चांद के चित्र को धारण कर
जलते हुए फटा कागज में
हाथ सेकते हुए बुढे को।
(५)
रोजी दास
किसी एक शैत्य
शून्य रात में
तुम्हारी रहस्यमय आंखों में
प्रेम की तीव्र विस्वन
तुम्हारी बाहों के बंधन में
कल मैं और
मेरे साथ गुज़ारे हुए
बेकार दिन सारे
सूखे बिस्तर में पड़े थे
तुम से मिलने की तृष्णा को लेकर
अब मेरे शरीर में
तुम्हारे होंठों के हस्ताक्षर
धो दिए सारे कलंक मेरे
ठीक पहली बारिश ज़ैसे
सभी संदेह के अंधेरे में
पहली किरण
तुम्हारा स्पर्श
एक अनोखी खुशी क़ी
यंत्रणा में
न्यून है कलंक
स्वीकार है मुझे
हाँ, मैं करता जा रहा हूँ
एक अर्वुद आनंदमय पाप
(६)
रोजी दास
मैं तुम से कितना प्यार करता हूँ
उस दिन शायद
तुम्हें ठीक से नहीं बोल पाया
राहू काल चल रहा होगा
इसलिए गले में दब कर रह गए
शब्दों के सारे सामर्थ्य
पेट,मन या हृदय
हर जगह,तरह तरह के भूख
कौन नाप सकता है उसे ?
अभी ,मन करता है
इस शरीर के हर एक कमरों के
द्वार को खोल कर
आवाज दूँ तुम्हें,
आओ, देखो ! इन कमरों में
कुछ अपेक्षाएं, कुछ प्रतारणा
चुपचाप रो रहें हैं
न भूलने वाली यादें
हृदय को घात करने लगी है
सर्दरात मेरे देह में
उत्ताप भरने लगे है
फिर भी मृत्यु तक
जीने को मज़बुर हूँ
प्रेमिका को शाय़द
मिल जाता है
वादा तोड़ने के लाइसेंस
अब भी उस गली के
दोनों तरफ के फैले हुए
रात कि रानी की महक में
तुम्हारे मुंह से निकल रही थी
‘विदाय’ शब्द
मेरे मृत सपनों की खाल पहनकर
अब तो , मैं ऐसा एक फटा हुआ
पृष्ठ हूँ
किसी किताब की
जिसे उजाले में भी
पढ़ा नहीं जा सकता
रोजी दास
चारों तरफ फ़ैल रहा
एक गंध
जल रही है ‘ विश्वास’ शब्द
उसके अंदर तुम धीरे धीरे
बदल रहे हो
प्रतारणा की प्रतिध्वनि।
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