नाम _ पारमिता षड़ंगी
पति- स्वप्नेन्दु मिश्र
सहर _ कांदिवली, मुंबई
जन्म तिथि_ १३.४.१९७२
जन्म स्थान_निमापडा , ओडिशा
लेखनी_ ओडिआ और हिंदी भाषा में कहानी और कविताएँ
प्रकाशित रचनाएं_ चार कहानी पूस्तकें
सम्मान_ साहित्य दर्पण श्रेष्ठ गाल्पिका, तिसरा किताब ब्रह्मपुर साहित्य संसद द्वारा पुरस्कृत
मेल आइडी_ paramitasarangi1972@gmail.com
"अनकही"
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वहाँ दीवारोँ पर
कुछ ना कुछ लिखा था
पसंद नापसंद करने को
नहीं था विकल्प वहाँ
अवसादों से घिरा
यह उदास शहर
किए जा रहा था समझौता
उसकी नीरव भाषा को
पढ़ नहीं सकती थी मैं
और वह घोषणा किए जा रहा था
शब्दों की मृत्यु की
ऐसी कोई बात नहीं
जो पहले से बताई नहीं गई
क्या सच में
शब्दों की अब
कोई आवश्यकता नहीं
इसलिए शायद इतना
ख़ामोश था यह शहर
अब किसी बगीचे से तोड़ूंगी
शब्दों को रखूंगी
सहेजकर अदिति की अंजुरी में,
मैं कर रही हूं पलायन
एक अन्य बगीचे की ओर
यहां तो लटक रहें हैं
शब्दों के शव।
घोड़े की लगाम खींच कर
देखा ऊपर आकाश में
उड़ रही थी शब्दों की खाल
और यह शहर
डूब रहा था
एक शुष्क
शब्दकोश की अंदर
©पारमिता षड़ंगी।
ओड़िआ
ଶୀର୍ଷକ" ମୋ ଭାରତ"
ତୁ ନେବୁ.... ନେଇ ଯା...
କେତେ ଥର ମୁଣ୍ଡ କୁ ମୋ'ର
ମୁଁ ତ ଶହୀଦ ହେବା ପାଇଁ
ଆସୁଥିବି ବାରମ୍ବାର,
ଗୁଳି ଖାଇଲି ଛାତିରେ
ନଅ ମାସ ର ଗର୍ଭବତୀ ସ୍ତ୍ରୀ ମୋର
ନା ମୋର ଦୁଃଖ ଥିଲା
ନା ସେ ଲୁହ ଝରାଇ ଥିଲା
ଗର୍ଭ ର ପୁଅ ମୋର ସଲାମ
ମୁଦ୍ରା ରେ ପହଁରୁ ଥିଲା ।
କାଲି ସେ ବାପ
ତା ପୁଅକୁ କାନ୍ଧରେ ନେଲା
ଆଖି ତ ଲୁହ ରେ ଭରା ଥିଲା
ହେଲେ ଛାତି ଟା
ଛପନ ଇଞ୍ଚ ର ଚଉଡ଼ା ଥିଲା।
ଏ ଖାଲି ଏକ ଭୂମି ନୁହେଁ
ଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ମଞ୍ଚ ଏ ଦୁର୍ବଳ ନୁହେଁ
ଏ ମଞ୍ଚ କୁ ରଙ୍ଗାଇଛି
ସୁଭାଷ ଙ୍କ ରକ୍ତ
ମା କହିଥିଲା,
" ରଖିବୁ ଭାରତ ର ଟେକ"
ତାବିଜ, ଲକେଟ୍,ମୌଲୀ
ଲଢିବାରେ ସାହାରା ହେଲା
ମା' ର ଆର୍ଶୀବାଦ ବି
କୋଉ କମ୍ ଥିଲା।
ଏବେ ଶୁଣ ସୀମା ସେପାରି ରୁ
ବନ୍ଧୁ ର ବନ୍ଧୁକ ମୁଁ
ଭଉଣୀ ର ଵାରୁଦ ମୁଁ
ଧ୍ୱଜ ର ତିନି ରଙ୍ଗ ମୁଁ
ଗଙ୍ଗା ର ପବିତ୍ରତା ମୁଁ
ଚାଲିଛି ସତସିଂହ ର
ମହାନାଦ ନେଇ
ଆଉ
ତୁ ନେବୁ.... ନେଇ ଯା
ମୁଣ୍ଡ କୁ ମୋ'ର
ମୁଁ ଲଢ଼ୁଛି....ଲଢୁଥିବି ବାରମ୍ବାର।
ପାରମିତା ଷଡ଼ଙ୍ଗୀ
Excellent. Keep writing
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंSuperb...mindblowing..writting as usual.. You are excellent writer with unusual ideas and thoughts. Keep writting more nd more so that we will get an opportunity to read more... I m very lucky to have such an intelligent writer as my best friend.. Love you nd your thoughts as well dear😘😘😘
जवाब देंहटाएंBahut khoob
जवाब देंहटाएंAchaa laga...meri subhakamanayen hamesha tuhmari sath heii 🌹👌
Excellent 👌👌👌👌👍👍
जवाब देंहटाएंExcellent
जवाब देंहटाएंFabulous, fantastic keep it up 👌👌👌👏👏👏👍👍👍
जवाब देंहटाएंशब्दों से खामोश शहर में भी अवसाद से ना घिरें क्योंकि अवसाद के ठूंठे वृक्षों पर भी सृजन की कोपलें फूटती रहती हैं वसंत आते रहते हैं। शो मस्ट गो आन ।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर संकलन और उत्कृष्ट शब्द चित्र!
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सभी का
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